क्षमा प्रार्थना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेहर्निशं मया।

दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्‌।

पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।

यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥

अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत।

यां गतिं सम्वाप्नोते न तां बह्मादयः सुराः॥

सापराधो स्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके।

इदानीमनुकम्प्योहं यथेच्छसि तथा कुरु॥

अक्षानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्नयूनमधिकं कृतम्‌ ॥

तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि॥

कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रेहे।

गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरि॥

गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतमं जपम्‌।

सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादात्सुरेश्वरि॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।