जागो जागो महाँकाली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

धुन- नगर में जोगी आया

जागो जागो महाँकाली l

जागो जागो माँ भवानी l

द्वार पे, अलख जगा ली,

स्वर्ग बना है श्मशान, श्मशान,,,

'काली माँ, जागो माँ, काली माँ' l

चण्ड मुण्ड ने, हम देवों को,

"युद्ध में, मईया हराया" l

भाग फिरे हम, देवता सारे,

"वोह, उत्पात मचाया" ll,,

जागो जागो महाँकाली,,,,F

ब्रह्मा विष्णु, शिव शँकर ने,

"अपने हाथ उठाए" l

वरदानी हैं, चण्ड मुण्ड माँ,

"वोह कुछ, कर न पाए" ll,,

जागो जागो महाँकाली,,,,F

देवों का, आवाहन सुनकर,

"जागी, है माँ काली" l

चण्ड मुण्ड की, सब असुरों की,

"गर्दन, माँ ने उड़ाई" ll,,

जागो जागो महाँकाली,,,,F

माँ के क्रोध ने, तीनों लोक में,

"हाहाकार मचाया" l

मार्ग में लेटे, शिव शँकर,

"छाती पैर धराया" ll,,

जागी जागी महाँकाली l

जागी जागी माँ भवानी l

असुर की, सेना मिटा दी,

असुरों का किया, सर्वनाश, सर्वनाश,,,

'जय जय माँ, काली माँ, जय जय माँ' lll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।