ऐसी कृपा करो श्री राधे मैं तो वृन्दावन वस जाऊँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे राधे, x13

ऐसी कृपा, करो श्री राधे ll, मैं तो वृन्दावन वस जाऊँ ll

वृन्दावन वस जाऊँ, मैं तो वृन्दावन वस जाऊँ l

ऐसी कृपा, करो श्री राधे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राधे राधे, x13

वृन्दावन में कुटीर बनाऊँ, ब्रज वासिन के टुकड़े खाऊँ l

यमुना जल में तिल ही पाऊँ ll, कुँजन में रम जाऊँ,

ऐसी कृपा, करो श्री राधे ll,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राधे राधे, x13

सेवा कुञ्ज में नित्त ही जाऊँ, सब भक्तन को शीश निवाऊँ l

ब्रज रज में मैं तो लोटत डोलूँ ll, ब्रज तन खूब लगाऊँ

ऐसी कृपा, करो श्री राधे ll,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राधे राधे, x13

नन्द गाँव बरसाने जाऊँ, भानोखऱ में मल मल नहाऊँ l

गहवर वन और ख़ोर साकरी ll, मोर कुटी बलि जाऊँ,

ऐसी कृपा, करो श्री राधे ll,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राधे राधे, x13

गोर्वर्धन की परिक्रमा लगाऊँ, मानसी गँगा में गोता लगाऊँ l

स्वर्ग लोक बैकुण्ठ न जाऊँ ll, श्याम चरण में आऊँ,

ऐसी कृपा, करो श्री राधे ll,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राधे राधे, x13

वृन्दावन में, कुँज गली में, यमुना तट पे,बंसी वट पे,

राधे राधे, x5

सेवा कुँज में, ब्रज गलियन में, नन्द गाँव में, भानोखर में,

राधे राधे x5

गहवर वन में, गौर साखरी, मोर कुटी में, श्याम कुटी में,

राधे राधे, x5

गोवर्धन में, जतीपुरा में, मानसी गंगा, राधा कुंड में,

राधे राधे, x5

बांके बिहारी, रास बिहारी, संतन प्यारी, प्यारी प्यारी,

राधे राधे, x5

रमन रेत में, कुट वन में, राधा वन में, शूलन वन में,

राधे राधे x5

सूर्यघाट पे, युगल घाट पे, पेड़ कदम पे, सखी वन में,

शिव गौड़ में, लंका कुंड में, राधा बलभ, सब मिल बोलो,

प्रेम से बोलो, प्रेम से बोलो,

राधे राधे x5

जय जय श्री राधे lll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।