चलो चलिए गुलाबी रुत्तं आईआं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चलो चलिए गुलाबी रुत्तं आईआं ,

सानु माता ने चिट्ठियां पाईआं,

माँ मेरी दे खेल न्यारे,

स्वर्गो सोहने माँ दे द्वारे,

झंडे झूलन खरकन टल्लीआं,

सांगता दे नाल सांगता रलिईआं,

लम्बे रस्ते ते ऊँची चराइयां,

सानु माता ने चिट्ठियां पाईआं,

सर ते चुनिया सुहे तने,

बन्न के तुर पे माँ दे दीवाने,

एक दूजे तो प्यार लुटांडे,

जय माता दी करदे जांदे,

लाल तेरे ते लालीआं छईआं ,

सानु माता ने चिट्ठियां पाईआं,

नच नच सरे माँ न मनाईये,

माँ भोली तो सदके जाइए,

कर्मा वालिया माँ दिया राहां,

सांगता दर्शन नू आईआं,

आज साबना ने खुशियां मना ईआं ,

सानु माता ने चिट्ठियां पाईआं,

मिल जाइये कंजक भोली,

उचा निवा ना तू बोली,

मियां दरस दिखा सकदी है,

कंजक रूप विच आ सकदी है,

गला कियां ने पार लगिया,

सानु माता ने चिट्ठियां पाईआं,

बेठी मियाँ खोल पंधारे,

मेहरा दे पाई शिते मरे,

दर्शी सबदे काज सवारे,

इक दो नी लाखा तारे,

इथे झोलियाँ ने सब ने फ़रिया,

सानु माता ने चिट्ठियां पाईआं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।