जय काली जय काली जय काली जय काली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय काली जय काली जय काली जय काली

जय काली जय काली काली

जय काली कलकते वाली जय काली

वार तेरा न जाये खाली जय काली जय काली काली।

गल मुंडा दी माला जचदी ,

कटे भुज्जावा दा लहंगा पा के नचदी,

भरीया रक्त नाल खप्पर खाली जय काली जय काली काली।

जय काली कलकते वाली जय काली।

जय काली कलकते वाली जय काली॥

जदो रूप हो जावे चंडी,

फिर दुष्टां दी वज जावे तुम्बी,

नेना दे विच भेरा दी लाली जय काली जय काली काली।

जय काली कलकते वाली जय काली।

जय काली कलकते वाली जय काली॥

शुम्भ निस्शुम नु मार डाली माँ

अपने भगता नु पार निकाली माँ

सो सो शेरा तो वध बलशाली जय काली जय काली काली।

जय काली कलकते वाली जय काली।

जय काली कलकते वाली जय काली॥

दुर्गे रूप च त्रिशूल साजे

काली च खड़ खड खडग वाजे

शिव भगतां नु भक्षण वाली जय काली जय काली काली।

जय काली कलकते वाली जय काली।

जय काली कलकते वाली जय काली॥

Uploaded By : दीपक सिंह (JMD स्वयं सेवक समिति) 7696461617

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।