प्रभु आपकी कृपा से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु आपकी कृपा से

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प्रभु आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है ll

करते हो तुम कन्हैया ll, मेरा नाम हो रहा है,

प्रभु आपकी कृपा से...,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

पतवार के बिना ही, मेरी नाव चल रही है ll

बिन मांगे हे कन्हैया, हर चीज मिल रही है l

करता नहीं मैं कुछ भी ll, सब काम हो रहा है l

करते हो तुम कन्हैया ll, मेरा नाम हो रहा है,

प्रभु आपकी कृपा से...,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तुम साथ हो जो मेरे, किस चीज की कमी है ll

किसी और चीज की अब, दरकार ही नहीं है l

तेरे साथ से गुलाम अब, गुलफाम हो रहा है l

करते हो तुम कन्हैया ll, मेरा नाम हो रहा है,

प्रभु आपकी कृपा से...,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा पार कैसे पाऊँ ll

टूटी हुयी वाणी से, गुणगान कैसे गाऊँ l

तेरी प्रेरणा से ही सब, ये कमाल हो रहा हैं l

करते हो तुम कन्हैया ll, मेरा नाम हो रहा है,

प्रभु आपकी कृपा से...,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मेरी जिंदगी में तुम हो, किस बात की कमी है ll

मुझे और अब किसी की, परवाह भी नहीं है l

तेरी बदौलतों से, सब काम हो रहा है l

करते हो तुम कन्हैया ll, मेरा नाम हो रहा है,

प्रभु आपकी कृपा से...,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

दुनियाँ में होंगे लाखों, तेरे जैसा कौन होगा ll

तुझ जैसा बंदा परवर, भला ऐसा कौन होगा l

पर थामा है तेरा दामन, आराम हो रहा है l

करते हो तुम कन्हैया ll, मेरा नाम हो रहा है,

प्रभु आपकी कृपा से...,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कोई नहीं था मेरा, फिरता था मारा मारा ll

बेआसरे को कन्हईया, तुमने दिया सहारा l

अब क्या बताऊँ मोहन, आराम हो रहा है l

करते हो तुम कन्हैया ll, मेरा नाम हो रहा है,

प्रभु आपकी कृपा से...,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मुझे हर कदम डगर पर, तुमने दिया सहारा ll

मेरी ज़िन्दगी बदल दी, तुमने करके एक इशारा l

एहसान पे तेरा ये, एहसान हो रहा है l

करते हो तुम कन्हैया ll, मेरा नाम हो रहा है,

प्रभु आपकी कृपा से...,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तूफ़ान आंधियों में, तूमने है मुझको थामा ll

तुम कृष्णा बन के आए, मैं जब जब बना सुदामा l

तेरा कर्म ये मुझी पे, सरेआम हो रहा है l

करते हो तुम कन्हैया ll, मेरा नाम हो रहा है,

प्रभु आपकी कृपा से...,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।