अगड़ बम बम लहरी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हाथ जोड़ के बोली गवर्जां l

एक सुनो अन्तर्यामी ll

तीनों लोक बसाये बसती में l

तूँ आप बसें वीराने में ll

अगड़ बम बबम, बगड़ बम बबम,

बम बबम बम, बम लहरी ll

एक सुनो जी पार्वती मेरी,

'एक सुनो गौरां रानी' l

इस जंगल में क्या पावेगी l

कन्दली वन में डर जावेगी ll

हाथी चिंघाडे शेर दहाड़े l

जीव जंतु और नर को खावे ll

अभी लौट जा ओ गौरां l

अभी मान जा ओ गौरां ll

अगड़ बम बबम, बगड़ बम बबम,

बम बबम बम, बम लहरी ll

अल्ख निरंजन अल्ख निरंजन l

तुम दीपक और मैं बाती ll

तुम चँदा मैं तेरी चकोरी l

तुम सूरज और मैं ज्योति ll

आप फूल तो मैं हूँ खुशबू l

तुम माला और मैं मोती ll

मेरे संग में विआह रचाओ l

हे बन जाओ जीवन साथी ll

अगड़ बम बबम, बगड़ बम बबम,

बम बबम बम, बम लहरी ll

मुझे समझ ले बुझता दीपक,

'इस दीए में तेल नहीं' l

बारां बारां साल की लगे समाधि l

रहे हमारा मेल नहीं ll

विआह शादी का सख़्त हैं बंधन l

करनी मैं चाहता जेल नहीं ll

मेरे संग में विआह रचाना l

कोई बच्चों का खेल नहीं ll

भंग पीऊँ मैं पीऊँ धतूरा,

'न पीऊँ शर्बत ताड़ी' l

अस्सी वर्ष की मेरी अवस्था l

तेरी उम्र अभी है बाली ll

अगड़ बम बबम, बगड़ बम बबम,

बम बबम बम, बम लहरी ll

एक सुनो मेरे भोले नाथ जी l

एक सुनो मेरे दीनानाथ जी l

दिन भर तेरी भंग रगड़ूँगी ll

भंग रगड़ूँ तेरा रगड़ूँ धतुरा l

काज़ करूँगी तेरा पूरा ll

हुकुम बजाऊँ तेरा पूरा l

तुझे पिलाऊँ तेरा तिरग्नादिया ll

जो बच जावे मैं पी लूँगी l

अमृत जान समझ पी लूँगी ll

शरण में ले लो भोलेनाथ जी l

अपनी बना लो दीनानाथ जी ll

अगड़ बम बबम, बगड़ बम बबम,

बम बबम बम, बम लहरी ll

एक सुनो जी पार्वती मेरी,

'एक सुनो गौरां रानी' l

भस्म रमाऊँ धुनी रमाऊँ l

तांडव कर कर डमरू बजाऊँ ll

तांडव कर कर डमरू बजाऊँ l

गुफा बीच मेरा है डेरा ll

मेरे नागों की माला गले पड़ी l

मेरे भूतों की टोली साथ खड़ी ll

तूँ तो देख इसे डर जावेगी xll

मेरे संग में क्या पावेगी l

कोई अच्छा कुँवर राजा का ढूँढ ले l

कोई रूप कुँवर राजा का ढूँढ ले ll

तूँ रानी बनकर बैठ महल में l

अरे समझ जा गौरां री ll

अगड़ बम बबम, बगड़ बम बबम,

बम बबम बम, बम लहरी ll

दिए वचन को आज निभाऊँ l

नहीं तो मेरा शाप पड़े ll

रूप जले तेरा जले नदिया l

ज्यों पर्बत कैलाश जले ll

पेड़ फूल फल पात जलेंगे l

बस्ती जंगल साथ जले ll

अभी मान जा भोले नाथ जी l

तीनो लोक तेरे नाथ जले ll

अगड़ बम बबम, बगड़ बम बबम,

बम बबम बम, बम लहरी ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।