जब से तुम सँग लौ लगाई

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब से तुम संग लो लगाई में बड़ी मस्ती में हूँ ॥

करके तुम संग आशनाई में बड़ी मस्ती में हूँ ॥

छा गई आँखों में दिल में बस तेरी दीवानगी

तुं ही तुं बस दे दिखाई में बड़ी मस्ती में हूँ।

बांकी चितवन सांवरी मनमोहनी सुरत तेरी

जब से दिल में है समाई में बड़ी मस्ती में हूँ।

अब तलक है गूंजती बांसुरी ये रसमयी ।

तान जो तुमने सुनाई में बड़ी मस्ती में हूँ ।

न मज़ा सुख में न दुःख में दर्द का अहसास है

वैद तुं तुं ही है दवाई में बड़ी मस्ती में हूँ ।

न तमन्ना दौलतों की शोहरतों की दास को

नाम की करते कमाई में बड़ी मस्ती में हूँ ।

जब से तुम संग लो लगाई में बड़ी मस्ती में हूँ ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।