हमे प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी माँ

पारंपरिक
श्री राम भजन रानी सती दादी भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रहे भगतो के सिर पे सदा तेरी चुनडी माँ

हमे प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी माँ

एक तो तेरा भवन रामघड दूजा फ़तेह पुर धाम

जिस ने शीश जुकाया आ कर उस के बन गए काम

दोनों है धाम तेरे है पावन नगरी माँ

हमे प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी माँ

सेडूराम जी हरितवाल का तूने वंश बडाया,

सदा राम को तूने दादी सचा मार्ग दिखाया

आज भी कर्ज धार है हम सारे चोधरी माँ

हमे प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी माँ

तेरी किरपा से मौज उड़ाते तेरे बेटे पोते

सोरव मधुकर चिंता कैसी दादी तेरे होते

तेरे ही चरणों में रखदी पगड़ी माँ

हमे प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।