अरे ओ अंजनी के लाला

लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

अरे ओ अंजनी के लाला, मुझे तेरा एक सहारा ॥

अब अपनी शरण में ले ले, मैं बालक हुँ दुखियारा

माथे पर तिलक विशाला, कानों में सुंदर बाला

थारै गले राम की माला, ओ लाल लंगोटे वाला

थारा रूप जगत से न्यारा, लगता है सबको प्यारा

प्रभु सालासर के माँही, थारो मंदिर है अति भारी

नित दुर दुर से आवै, थारै दर्शन को नर नारी

जो ल्यावै घ्रत सिंदुरा, पा ज्यावै वो फल पुरा

सीता का हरण हुआ तो, श्री राम पे विपदा आई

तुम जा पहुंचे गढ़ लंका, माता की खबर लगाई

वानर मिल कर सब बोले, तेरे नाम की जय जय कारा

जब शक्ति बाण लगा तो, लक्ष्मण जी को मुर्छा आई

वानर सेना घबराई, तब रोये राम रघुराई

तुम लाय संजीवन दीन्हा, लक्ष्मणजी के प्राण उबारा

बीच भंवर के माँही, मेरी नाव हिलोरें खाती

नहीं होता तेरा सहारा, तो कब की डुब ये जाती

अब दे दो इसे किनारा, प्रभु बनकर खेवनहारा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।