भोर भई जब सूरज निकले सिन्दूरी रंग छाये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भोर भई जब सूरज निकले सिन्दूरी रंग छाये

पवन के संग संग पंछी बोले मयूर मन मेरा गाये

मन यही गाये जय श्री श्याम .....

जय हो जय हो जय हो श्री श्याम

कलयुग का तू ही अवतारी पूजे तुझको दुनिया सारी

जग का तू ही पालनहारी तेरी महिमा जग से न्यारी

तेरी कृपा का गूँज रहा है दुनिया में जैकारा

हारे का सहारा जय श्री श्याम .....

जय हो जय हो जय हो श्री श्याम

नाम यही जो सबके काम सँवारे

तू श्याम नाम को मन में बसा ले

सरस सुहावन सबके मन को भावन

तू श्याम के संग में प्रीत लगा ले

शयन मान मोती को तू साँसों की माला बना ले

भाग जगा ले ....जय श्री श्याम .....

जय हो जय हो जय हो श्री श्याम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।