कान्हा मेरे मोहन मेरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा मेरे मोहन मेरे राधा तेरी रोती है

दिन रात न सोती है,

तुम गए मथुरा जब से तेरी याद सताती है,

और तेरे बिन मोहन मुझे नींद न आती है

चाहत नही जाती है दिन रात न सोती है

कान्हा मेरे मोहन मेरे राधा तेरी रोती है

दिन रात न सोती है,

तुम परसों की केह गए बीती तुम्हे है बरसो

क्यों भूल गए हम को तेरी यादों में तरसु

राधा ये बुलाती है दिन रात सोती है

कान्हा मेरे मोहन मेरे राधा तेरी रोती है

दिन रात न सोती है,

ये बिरहे बेदना है मुझको जलाती है ,

मेरे दिल में वसे हो तुम मुझे याद आती है ,

और लता ही रोती है दिन रात न सोती है

कान्हा मेरे मोहन मेरे राधा तेरी रोती है

दिन रात न सोती है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।