सतिगुरु नानकु प्रगटिआ

गुरु नानक देव जी
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॥ पावन पाठ ॥

सतिगुरु नानकु प्रगटिआ मिटी धुंधु जगि चानणु होआ,

सतिगुरु नानकु प्रगटिआ ....

जिउ करि सूरजु निकलिआ तारे छिपे अंधेरु पलोआ,

सिंघु बुके मिरगावली भंनी जाइ न धीरि धरोआ,

सतिगुरु नानकु प्रगटिआ ....

जिथे बाबा पैरु धरे पूजा आसणु थापणि सोआ,

सिधासणि सभि जगति दे नानक आदि मते जे कोआ,

सतिगुरु नानकु प्रगटिआ ....

घरि घरि अंदरि धरमसाल होवै कीरतनु सदा विसोआ,

बाबे तारे चारि चकि नउ खंडि प्रिथवी सचा ढोआ,

गुरमुखि कलि विचि परगटु होआ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।