नार करगसा आणी

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सभी भाया ने अरज मारी, नार करगसा आणी,

संत आता देखिया, दूध में मिलायो पाणी ,

पांच पच्चीस भैसियां मले, दोजा की धराणी,

संत आता देखियां, दूध में मिलायो पाणी ,

छाछ गालता छाती फाटे, दूध गालबो दोरो ,

रोटियां देता रोज आवे, झूठ बोलवो होरो ,

सगा जेठजीऊं लड़बा चाली, काणियां गुंगटा वाली ,

दोर जेठानियां ने गाल गमेड़ी,अबे मरदड़ी ने जाणी ,

कड़िया पहरे लगड़ पहरे, नांक में पहरे बाली,

नख-नख पर गहणो पहरके,घर का धणी सामे नाली,

पदम गुरूजी परवाणी मिलिया, लाडूरामजी जाणी ,

गुर्जर गरीबीऊं कनीरामजी बोले,न्यारी-न्यारी छाणी ,

गायक भेरू पुरी सोपुरा (भीलवाड़ा )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।