मैं भी आया हु दरबार माँ मेरी बिगड़ी बना दो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पावन ये द्वारा है सबसे निराला है

तेरे चरणों में झुकता संसार सारा है

मैं भी आया हु दरबार माँ मेरी बिगड़ी बना दो

सुन खाली न जाउगा दामन फेलाऊगा

दुखड़े जीवन के सारे तुम को सुनाउगा

मैं हु माँ तेरा लाल माँ मेरी बिगड़ी बना दो

तुम जगत की रानी हो करती सिंह सवारी हो

जिसकी रक्शा तुम करती फिर उसे माँ डर क्या हो

तुम मेरी मैं तुम्हारा हु फिर क्यों माँ बेसारा हु

दर तेरे आऊंगा दर्शन मैं पाऊंगा सपना जो है अधुरा पूरा कर जाऊँगा

मैं हु माँ तेरा लाल माँ मेरी बिगड़ी बना दो

परवतो पे रेहती हो सब के भाग जगाती हो

तेरे दर पे जो आये उसकी विपदा हरती हो

माँ मेरे भाग्य जगाओ मैं आया हु दर पे तुम्हारे,

झूमे गे नाचे गे तुम को मनायेगे

तेरे चरणों में मैया शीश झुकाए गे

मैं भी आया हु दरबार माँ मेरी बिगड़ी बना दो

मैं दीवाना हो गया हु चरणों में मुझको रख लेना

जन्म जन्म का हो वंदन मैया मुझको वर देना

मेरे सिर पे हाथ तुम्हारा हो माँ जब वेला अंधियारा हो

विशाल आये गा महिमा सुनाए गा मैया तेरे चरनो मे अर्जी लगाये गा

मैं भी आया हु दरबार माँ मेरी बिगड़ी बना दो

गायक और गीतकार विशाल जोशी देवास मप्र

फोन नम्बर 7000839796

संगीत श्री भावेश सोनी

छायांकन श्री कैलाश तारानी

यूनीक्स भक्ति यूटयूब चेनल की प्रस्तुति

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।