शिव शंकर भोले कैलाशी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

धुन- कान्हा आन वसो वृन्दावन में

शिव शँकर भोले, कैलाशी,

तेरे दर्श को अख्खियाँ, हैं प्यासी ll

तेरी जटा विच, गंगा धारा,

माथे पर सोहे, चंदा प्यारा l

प्रभु तूँ सब जग से, है न्यारा,

मेरे भोलेनाथ घट, घट वासी,,,

शिव शँकर भोले,,,,,,,,,,,,,,,,

देवों के देव, महाँदेव हो तुम,

सब की नईया के, खेव हो तुम l

हो सब से बड़े प्रभु, दानी तुम,

दुनियाँ तेरे चरनो, की दासी,,,

शिव शँकर भोले,,,,,,,,,,,,,,,,

एक वार तो दर्शन, दे जाना,

ये मन हैं मेरा प्रभु, दीवाना l

कोई करना नहीं, बहाना तुम,

मेरे दीन दयाला, अविनाशी,,,

शिव शँकर भोले,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं दर्श दीवानी, तेरी हूँ,

संकट ने प्रभु जी, घेरी हूँ l

ढूँढा रामेश्वर, और काशी,

शिव शँकर भोले, कैलाशी,,,

शिव शँकर भोले,,,,,,,,,,,,,,,,

*प्रभु तेरे कावड़, लाई हूँ,

चल हरिद्वार से, आई हूँ l

प्रभु तेरी आस, लगाई है,

तेरा रुक्म भी दर्शन, अभिलाषी,,,

शिव शँकर भोले, कैलाशी,

तेरे दर्श को अख्खियाँ, हैं प्यासी llll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।