नाथ मिल गया रे भोले नाथ मिल गया है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नाथ मिल गया रे भोले नाथ मिल गया है

मार लिया बाजी वैद नाथ मिल गया है

नाथ मिल गया रे.....

फिर सच हुई इक भक्त की कहानी रे,

शिव ने सकाष्ट होकर हरी परेशानी रे

साथ मिल गया रे सिर पे हाथ मिल गया रे

तार दिया मुझे तारक नाथ मिल गया रे

नाथ मिल गया रे

मांगता रहा मैं इस दुनिया से सुख रे,

पर सारे लोक हुए मुझसे बिमुख रे

साथ मिल गया है अब तो साथ मिल गया है

गई रे गरीबी भेरव नाथ मिल गया है

नाथ मिल गया रे

शिव ही सम्बाले गे ये मेरी है गारेंटी रे,

शिव बिना शव हो तो मिलेगी न शान्ति रे

पाप टल गया रे अब तो छाप टल गया रे

जीत लूँगा विशव को विश्व नाथ मिल गया है

नाथ मिल गया रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।