इस जीवन की, डोर तेरे हाथ रे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय हो जय हो, भोले बाबा, तोरे, चरणों में मन लागा,

भोले नाथ रे,,,

इस जीवन की, डोर तेरे हाथ रे ll

अल्ख निरंजन, भोले बम-बम, आशुतोष ब्रह्मचारी,

नाथों के हो, नाथ सदा-शिव, अभ्यंकर त्रिपुरारी ll

लागा, शँभू से अनुरागा, सारा, संकट पल में भागा,

भोले नाथ रे,,,

इस जीवन की, डोर तेरे हाथ रे l

जय हो जय हो, भोले बाबा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मनमौजी हो, शिव वरदानी, कण्ठ हला हलधारी,

अमर कथा के, स्वामी दाता, अम्बा के भरतारी ll

सच्चे, मन से जिसने साधा, लागे, भूत प्रेत न बाधा,

भोले नाथ रे,,,

इस जीवन की, डोर तेरे हाथ रे l

जय हो जय हो, भोले बाबा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शेषनाग शिव, गले विराजे, चंद्र-शीश शोभा पाए,

चिलम चमी का, तुरही के संग, बाघम्बर मन भाए ll

औघड़दानी, शिव मतवाला, जिसने, भूतों को है पाला,

भोले नाथ रे,,,

इस जीवन की, डोर तेरे हाथ रे l

जय हो जय हो, भोले बाबा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

देवों के, सरताज हो भोले, महाँदेव कहलाते,

श्री श्याम, गोकुल में सारी, दुविधा दूर हटाते ll

जिसको, मिल गई शिव की छाया, उसकी, पावन हो गई काया,

भोले नाथ रे,,,

इस जीवन की, डोर तेरे हाथ रे l

जय हो जय हो, भोले बाबा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।