गुरु जी तेथो वारि वारि वे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गुरु जी तेथो वारि वारि वे तुसी ता सारी दुनिया तारी ऐ,

नही लभना तेरे जेहा दुखा ने घेर लिया,

हूँ आई साड़ी वारी वे तुसी ता सारी दुनिया तारी ऐ

मेहर भरा हूँ हथ धर दे मनता साडी पूरी कर दे

जग तो बड़ी सताई हुई आ द्वार तेरे ते आई होई आ

पूजे तेनु दुनिया सारी ए,

हूँ आई साड़ी वारी वे तुसी ता सारी दुनिया तारी ऐ

डुगरी दे विच जन्म लिया सी

संगता दा उधार किया सी

उच्च नीच दा फर्क न कोई सब दा वेह्डा पार किया सी

तेरे तो सारा जग बलिहारी वे

तूसी ता सारी दुनिया तारे ऐ,

सब दे दिला दी जान दे ओ

बिन बोले पहचान दे ओ

मन्नी नु सहारा बस तेरा अपनी भगती दाज्ञान देयो

गावे तेरी महिमाँ प्यारी वे

तूसी ता सारी दुनिया तारे ऐ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।