झुलनी पे सेठ सांवरो झुलवा ने आवे सा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

झुलनी पे सेठ सांवरो झुलवा ने जावे सा,

झुलनी पे सेठ सांवरो झुलवा ने जावे सा,

रंग गुलाल उड़ावे सा मण्डफिया मे,

कोई रंग गुलाल उड़ावे सा मण्डफिया में...

चांदी के बेवाण विराजे ठाकुर मुरली वाला सा ,

मुरली मधुर बजावे सा मण्डफिया मे,

देखो मुरली मधुर बजावे सा मण्डफिया मे,

भारी भीड़ मे चले सवारी देख्या ही बण आवे सा

ये तो हाथी घोड़ा नचावे सा मण्डफिया मे,

कोई रंग गुलाल उड़ावे सा मण्डफिया में...

सोना चाँदी चढ़ी छत्तर हाथा मे ले चाले सा ,

फूल गुलाल उड़ावे सा मण्डफिया मे,

कोई फूल गुलाल उड़ावे सा मण्डफिया मे,

चेतन कैसेट्स चरना माही , राखो छतर चाया सा

जगदीश गुण जस गावे सा मण्डफिया में...

कोई रंग गुलाल उड़ावे सा मण्डफिया में...

मण्डफिया वाला सेठ सांवरा घणो भारोसो भारी सा ,

बिगडिया काम बणावे सा मण्डफिया मे,

कोई बिगड़ा काम बणावे सा मण्डफिया मे,

झुलनी पे सेठ सांवरो झुलवा ने जावे सा,

झुलनी पे सेठ सांवरो झुलवा ने जावे सा,

रंग गुलाल उड़ावे सा मण्डफिया मे,

कोई रंग गुलाल उड़ावे सा मण्डफिया में...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।