ओ मेरी लक्ष्मी माता जग में माया तेरी अपरम्पार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ मेरी लक्ष्मी माता जग में माया तेरी अपरम्पार

शाम सवेरे आप की पूजा करता है सारा संसार

ओ मेरी लक्ष्मी माता जग में माया तेरी अपरम्पार

के माँ प्रगत हुई सागर से प्यारी तुम विष्णु भगवान की,

इस दुनिया में सब को लालच आप के ही वरदान की

इक इशारा कर दे आप को भर जाते खाली भंडार,

ओ मेरी लक्ष्मी माता जग में माया तेरी अपरम्पार

हे माँ क्या कंगला क्या साहूकार क्या राजा और भिखारी

आप की पूजा करते है सब बन चरणों के पुजारी

बिना आप के इस दुनिया में मैया जीना है बेकार

ओ मेरी लक्ष्मी माता जग में माया तेरी अपरम्पार

हे माँ आप से सब सगे संबधी आप से रिश्ते नाते ,

आप बिना अपने भी मैया दूर से आँख चुराते

आप से ही तो मिलती इज्जत आप दिलो की है सत्कार

ओ मेरी लक्ष्मी माता जग में माया तेरी अपरम्पार

उधार नगद क्या गलत सही सब चाहे आप को पाना,

पाओ पकड़ सब करे प्राथना माँ तुम छोड़ न जाना

बैठ कमल पे सरल लिखा के

घर आ जाओ इक बार

ओ मेरी लक्ष्मी माता जग में माया तेरी अपरम्पार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।