राहा ओखियाँ च तुरना सखाई वे

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरे साईं वे आई फेरा पाई वे राहा ओखियाँ च तुरना सखाई वे

एह नी जिन्दगी ब्ताओनी संग संग मैं

तू ही दिसे जदो अखा करा बंद मैं

साईं तेरे नाम बितावा हर पल मैं

साईं नाम तो बेगैर बे रंग मैं

कदे भगता नु दिलो न बुलाई वे

राहा ओखियाँ च तुरना सखाई वे

सारे जग दा ही मंगा सैयां सुख मैं हस खेड के ही बितावा हर रुत मैं

सैयां हार गया तहानु पूछ पूछ मैं होर कीने मैं हंडाने दसो दुःख मैं

झोली सुखा नाल मेरी भर जाई वे,

राहा ओखियाँ च तुरना सखाई वे

तक राहवा थक अखा गैया मेरिया

नहियो मुकिया उडीका साइया तेरियां

तेज चलन हवावा भी बथेरियां

गल्ला भगता ने तेरियां ही छेडिया

पल दो पल साडे नाल बिताई वे

राहा ओखियाँ च तुरना सखाई वे

गीत तेरे ते जिंदर बनाउंदा ऐ,

मनी भगता नु गा के सुनांदा ऐ

आप नचे नाल सब नु न्चौन्दा ऐ,

साईं संदेया च रोनका ल्वान्दा ऐ,

मेनू सुर नाल ताल भी दे जाई वे

राहा ओखियाँ च तुरना सखाई वे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।