हमने आँगन नहीं बुहारा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हमने आँगन नहीं बुहारा, चँचल मन को नहीं सम्हारा,

"कैसे आयेंगे भगवान xll"

हर कोने कल्मष कषाय की, लगी हुई है ढेरी।

नहीं ज्ञान की किरण कहीं है, हर कोठरी अँधेरी।

आँगन चौबारा अँधियारा ll, "कैसे आएँगे भगवान xll"

हमने आँगन नहीं बुहारा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हृदय हमारा पिघल न पाया, जब देखा दुखियारा।

किसी पन्थ भूले ने हमसे, पाया नहीं सहारा।

सूखी है करुणा की धारा ll, "कैसे आएँगे भगवान xll"

हमने आँगन नहीं बुहारा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

अन्तर के पट खोल देख लो, ईश्वर पास मिलेगा।

हर प्राणी में ही परमेश्वर, का आभास मिलेगा।

सच्चे मन से नहीं पुकारा ll, "कैसे आएँगे भगवान xll"

हमने आँगन नहीं बुहारा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

निर्मल मन हो तो रघुनायक, शबरी के घर जाते।

श्याम सूर की बाँह पकड़ते, साग विदुर घर खाते।

इस पर हमने नहीं विचारा ll, "कैसे आएँगे भगवान xll"

हमने आँगन नहीं बुहारा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।