जानो पड़सी रे पंछी

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॥ पावन पाठ ॥

जानो पड़सी रे पंछी,

यह बागा में छोड़,

एक दिन जाना पड़सी रे

किया घोंसला चुनचुन तिनका,

पर तेरा विश्वास ना क्षण का,

किया साथ थे किनका किनका,

छोड़ियां सरसी रे ओ पंछी,

सब सगिया को साथ,

एक दिन जाणो पडसी रे

जब तक है पिंजरा में वासा,

तब तक है दुनिया को आशा,

तब तक है बन माई बासा,

टेम निकलसी रे हो पंछी,

जो करणो जट करले,

फेर फचताणो पडसी रे

अब ऊडबा को आग्यो दिनडो,

बिलक बिलक बिलकावे जीवडो,

जतना सु राखयो कर बनडो,

जाणो पडसी रे पंछी,

यह बागा ने छोड जाना पड़सी रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।