मत कर माया को अहंकार

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॥ पावन पाठ ॥

मत कर माया को अहंकार

मत कर काया को अभिमान

काया गार से काची

मत कर माया को अहंकार

मत कर काया को अभिमान

काया गार से काची

हो काया गार से काची

जैसे ओस रा मोती

झोंका पवन का लग जाए

झपका पवन का लग जाए

काया धूल हो जासी

काया तेरी धूल हो जासी

ऐसा सख्त था महाराज

जिनका मुल्कों में राज

जिन घर झूलता हाथ

जिन घर झूलता हाथी

हो जिन घर झूलता हाथी

उन घर दिया ना बाती

झोंका पवन का लग जाए

झपका पवन का लग जाए

काया धूल हो जासी

काया तेरी धूल हो जासी

खूट गया सिन्दड़ा रो तेल

बिखर गया सब निज खेल

बुझ गयी दिया की बाती

हो बुझ गयी दिया की बाती

रे जैसे ओस रा मोती

झोंका पवन का लग जाए

झपका पवन का लग जाए

काया धूल हो जासी

काया तेरी धूल हो जासी

झूठा माई थारो बाप

झूठो सकल परिवार

झूठी कूटता छाती

झूठी कूटता छाती

हो झूठी कूटता छाती

जैसे ओस रा मोती

बोल्या भवानी हो नाथ

गुरुजी ने सर पे धरया हाथ

जिनसे मुक्ति मिल जासी

जिनसे मुक्ति मिल जासी

बोल्या भवानी हो नाथ

गुरुजी ने सर पे धरया हाथ

जिनसे मुक्ति हो जासी

जिनसे मुक्ति हो जासी

हो जिनसे मुक्ति मिल जासी

जैसे ओस रा मोती

झोंका...

झोंका...

मत कर माया को अहंकार

मत कर काया को अभिमान

काया गार से काची

हो काया गार से काची

जैसे ओस रा मोती

झोंका पवन का लग जाए

झपका पवन का लग जाए

काया धूल हो जासी

काया तेरी धूल हो जासी

काया तेरी धूल हो जासी

काया तेरी धूल हो जासी

काया धूल हो जासी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।