माँ तो है माँ माँ तो है माँ

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

माँ तो है माँ माँ तो है माँ

माँ जैसी दुनिया में है कोई कहा

ओ माँ ओ माँ

माँ तो है माँ माँ तो है माँ

माँ तू ही मंदिर माँ तू ही पूजा पूजा का वरदान माँ,

ये लोक तू परलोक तू है तुझमे है दोनों जहां

माँ तू भगवान का दूसरा रूप है तेरी सूरत में परमात्मा

माँ तो है माँ माँ तो है माँ

माँ तेरी ममता गंगा की धारा है स्वर्ग साया तेरा

जो प्यार तूने हम को दिया है क्या देगा कोई दूसरा,

माँ तेरा मोल तो है उसकी को पता

नही जिसकी कोई माँ याहा

माँ तो है माँ माँ तो है माँ

टुटा जो तेरी आँखों का तारा टूटे जो सपने तेरे

हर दर्द तेरा हम बाँट लेंगे पोंछेगे अनसु तेरे

तू अकेली नही बेसहारा नही अब सहारा तेरा हम है माँ

माँ तो है माँ माँ तो है माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।