बड़ी खुद गरज दुनिया है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बड़ी खुद गरज दुनिया है कोई न दर्द जाने माँ

दिए जो जख्म दुनिया ने

दिए जो जख्म सीने में तुझे आये दिखाने माँ

यहा सारा मतलब का याहा मतलब के नाते

बिछा के राह में कांटे हमे चलता सिखाते है,

गई मुश्कान होठो की पड़े आंसू बहाने माँ

बड़ी खुद गरज दुनिया है कोई न दर्द जाने माँ

छुपी खुशियाँ निगाहो से अँधेरे गम के छाए है,

मेरे अरमान मेरे सपने यु अश्कों में समाये है,

मेरे अपने बने दुश्मन लगे हस्ती मिटाने माँ

बड़ी खुद गरज दुनिया है कोई न दर्द जाने माँ

मेरी तकदीर में दाती बता क्यों ठोकरे लिखदी

आमवास रात है छाई ख़ुशी पल वर को न दिखती,

मैं केवल टूट के बिखरा यही आया बताने माँ

बड़ी खुद गरज दुनिया है कोई न दर्द जाने माँ

तेरे दरबार से मैया कोई खाली नही जाता

झुकी गर्दन यो श्रधा से मुरादे दिल की वो पाता,

चरण में आ गया रणजीत मुकदर अजमाने माँ

बड़ी खुद गरज दुनिया है कोई न दर्द जाने माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।