जोगी रत्नों दा वसदा शाहतलाईया

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बाल सुनेहरी हथ विच चिमटा कनी मुंदरा पाइयां,

जोगी रत्नों दा वसदा शाहतलाईया

जिसते जोगी कर्म कमावे बेड़े भने लौंदा,

जिसदे सिर ते हथ रखदे मुहो मंगियाँ मुरादा पाउंदा,

रंग एह्दे विच रंग जो एह्दा कर लो किरत कमाईया,

जोगी रत्नों दा वसदा शाहतलाईया

विच गुफा दे विच बैठा जोगी चार युगा दा वाली

लेके आवे जो फर्यादा कदे न मुड दा खाली,

जिसदी फड ले बाह योगी फिर ओह्दियाँ होंन चडाईया

जोगी रत्नों दा वसदा शाहतलाईया

मोर दी करे सवारी ते रत्नों दी अख दा तारा,

नूर चेहरे ते कुदरत दा है दिल कश अजब नजारा

औना है घर जोगी ने नवनीत ने पलका बिछाईया

जोगी रत्नों दा वसदा शाहतलाईया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।