तेरा मुखड़ा तक तक साईंया लख लख शुकर मनावा गी

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॥ पावन पाठ ॥

गल सुन मेहरा वाले साईंया

प्रीता नाल तेरे मैं लाईया,

कसमा जन्म जन्म लई खाईया

लगियां तोड़ निभावागी

तेरा मुखड़ा तक तक साईंया लख लख शुकर मनावा गी

दिल विच तेरा नूर समाया अखियाँ विच मूरत तेरी

हर पासे दिसदी है मेनू चन वर्गी सुरत तेरी,

ना कोई चंगा ना कोई मंदा हर बन्दा साईं दा बन्दा

इज्जत मान मैं देके सब नु शीश झुकावा गी

तेरा मुखड़ा तक तक साईंया लख लख शुकर मनावा गी

जद जद भी तेनु तका मैं रब दे दर्शन हुँदै ने

कखा वर्गे कर्म मेरे लखा दे नाल खलोंदे ने

डूबदी डूबदी पार उतर गई

तेरा पल्ला फड के तर गई उचेया शाना वालेया नीवी बन इतरावा गी

तेरा मुखड़ा तक तक साईंया लख लख शुकर मनावा गी

तू मेरा मैं तेरी होगी जन्म जन्म लई वे साईंया

एह दुनिया की जाने साडे प्रेम प्यार दी गहराईया

साहिल हो गई बल्ले बल्ले रब ने किते कम सवले

हर इक सास ते साईंया तेरा ना लिखवागी,

तेरा मुखड़ा तक तक साईंया लख लख शुकर मनावा गी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।