आठ ही काठ के कोठारिया हे दीनानाथ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आठ ही के काठ के कोठरिया हो दीनानाथ ,

रूपे छा ने लागल केवाड़

आठ ही के काठ के कोठरिया हो दीनानाथ ,

रूपे छा ने लागल केवाड़

ताहि ऊपर चढ़ी सुतले हो दीनानाथ

बांझी केवडूवा धइले ठाड़

ताहि ऊपर चढ़ी सुतले हो दीनानाथ

बांझी केवडूवा धइले ठाड़

चदर उघारी जब देखले हो दीनानाथ ,

कौन संकट पडल तोहार

चदर उघारी जब देखले हो दीनानाथ ,

कौन संकट पडल तोहार

पुत्र संकट पडल मोरा हो दीनानाथ

ओहिला केवडूवा धईले ठाड़।

पुत्र संकट पडल मोरा हो दीनानाथ,

ओहिला केवडूवा धईले ठाड़

चदर उघारी जब देखले हो दीनानाथ ,

कौन संकट पडल तोहार

चदर उघारी जब देखले हो दीनानाथ ,

कौन संकट पडल तोहार

नैना संकट पड़ल मोरा हो दीनानाथ

ओहिला केवडुआ धईले ठाड़

नैना संकट पड़ल मोरा हो दीनानाथ

ओहिला केवडुआ धईले ठाड़

चदर उघारी जब देखले हो दीनानाथ ,

कौन संकट पडल तोहार

चदर उघारी जब देखले हो दीनानाथ ,

कौन संकट पडल तोहार

काया संकट पडल मोरा हो दीनानाथ ,

ओहिला केवडुआ धईले ठाड़

काया संकट पडल मोरा हो दीनानाथ ,

ओहिला केवडुआ धईले ठाड़

बांझीनी के पुत्र जब दिहले दीनानाथ

खेलत-कुदत घर जात

बांझीनी के पुत्र जब दिहले दीनानाथ

खेलत-कुदत घर जात

अन्हरा के आंख दिहले कोढ़िया के कायावा

हसत बोलत घर जात

अन्हरा के आंख दिहले कोढ़िया के कायावा

हसत बोलत घर जात

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।