केलवा के पात पर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके

के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके

हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी,

के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी,

हमरो जे बेटवा तोहन अइसन बेटावा से उनके लागी,

से करेली छठ बरतिया से उनके लागी,

अमरूदिया के पात पर उगे लन सुरुजमल झाके झुके,

के करेलू छठ बरतिया से झाके झुके,

हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी,

के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी,

हमरो जे स्वामी तोहन अइसन स्वामी से उनके लागी,

से करेली छठ बरतिया के उनके लागी,

नारियर के पात पर उगे लन सुरुजमल झाके झुके,

के करेली छठ बरतिया से झांके झुके,

हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी,

के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी,

हमरो जे बेटी तोहन बेटिया से उनके लागी,

से करेली छठ बरतिया से उनके लागी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।