आन वसो नंदलाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आन वसो नंदलाल, मेरे सूने मंदिर में ll

छाया जिस में, घोर अँधेरा l

तुम आओ तो, होवे उजियारा l

तुम बिन, है सुनसान, मेरे सुने मंदिर में,,,

आन वसो नंदलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

घण्टे और, घड़ियाल नहीं है l

सामग्री का, थाल नहीं है l

मोह माया, का है जाल, मेरे सुने मंदिर में,,,

आन वसो नंदलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मेरा मन, दर्वेश नहीं है l

बगुले जैसा, भेस नहीं है l

प्रेम का है, यह हाल, मेरे सुने मंदिर में,,,

आन वसो नंदलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कान्हा मेरे, मंदिर आना l

मेरे हाथों, भोग लगाना l

आना, हो के दयाल, मेरे सुने मंदिर में,,,

आन वसो नंदलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।