माँ रतनो दा लाल सोहना

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

माँ रतनो दा लाल सोहना सारे जग दा वाली

बोह्डा थले धुना लाया बन गौआ दा वाली

दर ते आया नु कदे मोड़े न खाली

शाहतलाइया दी धरती नु लख लख शीश जुकावा

जिथे मेरा जोगी वसदा दर्शन करके आवा

पोनाहारी नु दिल दा हाल सुनावा

थेड़े रज रज जावा जिहदे हथ विच चिमटा प्यारा

बैठा विच गुफा दे जेह्डा सब नु बक्शन हारा

अपने भगता नु देवे नाथ सहारा

मन दी भटकन मूक गई मेरी इस दर उते आके

पार भ्रम दे दर्शन हो गे धुड मथे नु लाके

धन धन हो गया हां दर्श जोगी दा पाके

पुरियां होन मुरादा जिथे एह दरबार है सोहना

स्जेया विच पहाडा दे न होर एहो जेहा होना

जिथे मूक जाना जिन्दगी भर दा रोना

तन मन जिसनू अर्पण करके बुला मैं बक्शावा ,

मूसा पुरियां सोनू सदा गुण योगी दे गावा

चिमटे वाले दा मैं पल पल नाव ध्यावा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।