चाँद चमके सदा रौशनी के लिए

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चाँद चमके सदा रौशनी के लिए

मेरी पूजा है मेरे पति के लिए

साल का इक दिन मेरा अपना है दिन,

वर्त ये मेरा है दिन अन अरजल के बिन

सिर्फ उनकी बनी जिन्दगी के लिए

मेरी पूजा है मेरे पति के लिए

जब तलक न मुझे दीखता चन्द्रमा ,

तब तलक धोलती है मेरी आत्मा

ये कठिन पल सजे हर ख़ुशी के लिए

मेरी पूजा है मेरे पति के लिए

हर घडी हर सुहागन की है कामना

रोज अपने पति का करे समाना

ऐसा वर्त कौन रखता किसी के लिए

मेरी पूजा है मेरे पति के लिए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।