गुरु जी मेरे शिव अवतारी

पारंपरिक
महादेव भजन साईं भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे गुरु जी पत रखना सदा बचेया दी

भगता दी संगता दी तूसी जग दे हो वाली

गुरु जी मेरे शिव अवतारी गुरु जी मेरे सच दे पुजारी

गुरु जी मेरे भोले भंडारी

मेरे गुरु जी मेरे गुरु जी

गुरु जी शरण विच आओ भगतो,

चरना च शीश जुकाओ भगतो

गुरु जी किरपा मिलदी नसीबा नाल

सत्संग विच लाओ हाजरी

गुरु जी करदो कल्याण

गुरु जी मेरे शिव अवतारी गुरु जी मेरे सच दे पुजारी

गुरु जी मेरे भोले भंडारी

मेरे गुरु जी मेरे गुरु जी

गुरु जी दे चाकर बन के रहिये

गुरु को सारी खुशियाँ लईये,

गुरु जी दे दर ते आये जो भी सवाली

भर दिंदे दाता झोलियाँ खाली

गुरु जी मेरे शिव अवतारी गुरु जी मेरे सच दे पुजारी

गुरु जी मेरे भोले भंडारी

मेरे गुरु जी मेरे गुरु जी

सब श्रृष्टि दा मालिक तू है

बड़े मंदिर दा चालक तू है

तेरा रविंदर शोभा करे दिन राती

ओहने दीपक नैना बाती,

गुरु जी मेरे शिव अवतारी गुरु जी मेरे सच दे पुजारी

गुरु जी मेरे भोले भंडारी

मेरे गुरु जी मेरे गुरु जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।