अपनी बेहन के प्यार को भैया न बुलाना

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॥ पावन पाठ ॥

अपनी बेहन के प्यार को भैया न बुलाना

आ जाओ तुम भाई दूज पर दिल न मेरा दुखाना

अपनी बेहन के प्यार को भैया न बुलाना

अपना पूरा बचपन साथ साथ है बीता,

ना कोई भी हारा और न कोई जीता,

कभी दूर हो भैया तुमसे माथे तिलक सजाना

अपनी बेहन के प्यार को भैया न बुलाना

बंधन है ये प्यार का है सब से अनमोल,

इन्तजार है तेरा भैया कुछ तो बोल

रूठा भी है अगर तू मुझसे आता है मुझे मनाना

अपनी बेहन के प्यार को भैया न बुलाना

पूनम के हाथो में सजी हुई है थाली,

आ जाओ राजू भईया शुभ घडी निकलने वाली

तेरे मेरे प्यार को नजर लगाये न ये जमाना

अपनी बेहन के प्यार को भैया न बुलाना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।