कभी शिवजी के मंदिर गया ही नहीं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कभी शिवजी के मंदिर गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से क्या फायदा,

शिव का ध्यान कभी भी लगाया नहीं,

सिर्फ दीपक जलाने से क्या फायदा,

लाख माथे पे अपने तू चंदन लगा,

बिन पूजा के कुमकुम का टिका लगा,

गुणगान कभी इनका गाया नहीं,

उपदेश सुनाने से क्या फायदा,

कभी शिव जी के मँदिर गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से क्या फायदा

रोज पानी से तन को तो धोया मगर,

मन के मेल को अब तक मिटाया नहीं,

सच्चा प्रेम ह्रदय में बसाया नहीं,

रेवा जल में नहाने से क्या फायदा,

कभी शिव जी के मँदिर,...

दुसरो को तो धर्म की बातें कहे,

धर्म की राह पर तू स्वयं ना चले,

सच्चे धर्म का जिसको ज्ञान नहीं,

ऐसा ज्ञानी कहलाने से क्या फायदा,

कभी शिव जी के मँदिर,........

शाम ढलते ही घर में उजाला करे,

मन में भक्ति का दीपक जलाया नहीं,

शिव शंकर की आरती उतारी नहीं,

सिर्फ डमरू बजाने से क्या फायदा,

कभी शिव जी के मँदिर....

शिव के चरणों को छोड़ के जाना कहाँ,

शिव धाम बिना है ठिकाना कहाँ,

शिव के चरणों में बन्दे रम जा जरा,

व्यर्थ जीवन बिताने से क्या फायदा,

कभी शिव जी के मँदिर.......

शिव शंकर ही तेरा उद्धार करे,

तेरे जीवन की नैया को पार करे,

शिव का नाम तो सारा जमाना कहे,

फिर व्यर्थ भटकने से क्या फायदा,

कभी शिव जी के मँदिर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।