ओम जय जय जय गिरिराज आरती

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओम जय जय जय गिरिराज,

स्वामी जय जय गिरिराज,

संकट में तुम राखो,

निज भक्तन की लाज,

ॐ जय जय जय गिरिराज

इंद्रादिक सब सुर मिल तुम्हरो ध्यान धरे,

ऋषि मुनि जन यश गावे ते भवसिंधु तरे,

ॐ जय जय जय गिरिराज..

सुन्दर रूप तुम्हारो श्याम शिला सोहे,

वन उपवन लखि लखिके भक्तन मन मोहे,

ॐ जय जय जय गिरिराज....

मध्य मानसी गंगा कलि के मल हरनी,

ता पे दीप जलावे उतरे बैतरनी,

ॐ जय जय जय गिरिराज...

नवल अप्सरा कुण्ड सुहावन पावन सुखकारी,

बाएं राधा कुण्ड है नहावे महापाप हारी,

ॐ जय जय जय गिरिराज...

तुम ही मुक्ति के दाता कलयुग में स्वामी,

दीनन के हो रक्षक प्रभु अन्तर्यामी,

ॐ जय जय जय गिरिराज,...

हम है शरण तुम्हार गिरिवर गिरधारी,

देवकीनंदन कृपा करो हे भक्तन हितकारी,

ॐ जय जय जय गिरिराज..

जो नर दे परिक्रमा पूजन पाठ करें,

गावे नित्य आरती पुनि नहीं जनम धरे,

ॐ जय जय जय गिरिराज..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।