वनवास मेरे प्राण का प्यारा चला गया

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

वनवास मेरे प्राण का प्यारा चला गया,

मेरी ज़िन्दगी का राम सहारा चला गया,

कैकई ने ज़ुल्म ढाया है वचनों को मांग कर,

चौदह बरस को आँख का तारा चला गया,

वनवास मेरें प्राण का प्यारा चला गया,

भाई लखन व सीता भी सब साथ हो लिए,

हाय अवध से राज दुलारा चला गया,

वनवास मेरें प्राण का प्यारा चला गया

है दिल पे दौर ऐसे हम कैसे जी सकेंगे,

हम से बिछड़ के लाल हमारा चला गया,

वनवास मेरें प्राण का प्यारा चला गया

यह राम की जुदाई ऐसे पदम् ने गायी,

जैसे अवध का राज दुलारा चला गया,

वनवास मेरें प्राण का प्यारा चला गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।