मैं केहता हु मेरे संग माँ की तस्वीर चलती है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सब पूछते है संग क्या तेरे तकदीर चलती है,

मैं केहता हु मेरे संग माँ की तस्वीर चलती है

पहले हो माँ की पूजा फिर काम हो कोई दूजा

बाई ऐसी भी क्या भगती लोगो ने मुझसे पुछा

भगतो के चारो और इक लकीर चलती है,

मैं केहता हु मेरे संग माँ की तस्वीर चलती है

वो नवरातो का मेला जग आये माँ का हेला

भगती में झूम ते गाते चलता भगतो का रेला

माँ का जय कार लगाते भगतो की भीड़ चलती है,

मैं केहता हु मेरे संग माँ की तस्वीर चलती है

सोरव मधुकर क्या रिश्ता हम भगतो का क्या नाता

हम एक ही माँ के बेटे अपनी है पहाड़ी माता,

इक दूजे को जोड़े जैसे जंजीर चलती है

मैं केहता हु मेरे संग माँ की तस्वीर चलती है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।