लक्ष्मी का वास हो जिस घर में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लक्ष्मी का वास हो जिस घर में उस घर में रोज दिवाली है

तुमसे ही इज्जत मान मिले हर आशाओं का फुल खिले,

झोली फैलाए जग सारा माता के सभी सवाली है,

लक्ष्मी का वास हो जिस घर मे.....

खुशियाँ तुझसे तुम बिन गम है किरपा बिन ये आँखे नम है,

है चाँद सा मुखड़ा माँ तेरा जिसपे सूरज की लाली है,

लक्ष्मी का वास हो जिस घर मे.......

तेरे चरण जहाँ जाते माता खुशियों से दामन भर जाता,

जिस जगह पे वास ना तेरा हो सब लगता खाली खाली है,

लक्ष्मी का वास हो जिस घर मे.........

महिमा तेरी माँ न्यारी है शिवपुरी चरणों का पुजारी है,

जाते है दिन संवर उनके जिनपे नज़रे माँ डाली है,

लक्ष्मी का वास.....

विष्णु जी है जग के पालक मैया तू है धन संचालक,

निर्धन को तू धनवान करे हर बात तेरी माँ निराली है,

लक्ष्मी का वास हो जिस घर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।