भैरू रो दरबार, जग में सबसुं न्यारो हैं..

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॥ पावन पाठ ॥

भैरू रो दरबार, ई जग में सबसुं न्यारो हैं,

ओ तो भक्तों रो रखवालो हैं,

भैरू रो दरबार, ई जग में सबसुं न्यारो हैं..

भय दुर कर देवे, हर संकट हर लेवे, भैरू थारो नाम हैं,

भुत प्रेत वाने नजदीक ना आवे, जठे थारो वास हैं..

तेरे भक्त सभी, भैरू बिन ना चालें गुजारो है,

ओ तो भक्तों रो रखवालो हैं,

भैरू रो दरबार, ई जग में सबसुं न्यारो हैं..

दुःखियों रा दुःख हर्या, जो आया भाव भर्या, भैरू थारा दरबार मे,

आंधो ने आख्या दी, कोड़ी रा कोड हर्या, म्हारा सरकार ने..

म्हाने तो भैरु, थारा नाम रो सहारो हैं,

ओ तो भक्तों रो रखवालो हैं,

भैरू रो दरबार, ई जग में सबसुं न्यारो हैं..

भक्तों री या वाणी, घर घर में हैं जानी, गावा थारा गीत हैं,

विपिन भी ओ केवे, म्हारा जीवन रखवाला, लागी थासूं प्रीत हैं..

जनम जनम रो साथ, भैरू थाने ही निभानो हैं,

ओ तो भक्तों रो रखवालो हैं,

भैरू रो दरबार, ई जग में सबसुं न्यारो हैं..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।