माँ जैसा कोई जग में कहा है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय जय जय माँ

जय जय जय जय माँ

माँ जैसा कोई जग में कहा है

ये संसार भी माँ से बना है

देवी है ये सारे भ्र्मांड की माँ है

माँ जैसा कोई जग में कहा है

ये संसार भी माँ से बना है

संसारी माँ को बस अपने लाल को ही सम्बाले

पर ये माँ तो ख़ुशी ख़ुशी सारा संसार सम्बाले

दुनिया के हर नर नार की माँ है

ये माँ सारे संसार की माँ है

माँ जैसा कोई जग में कहा है

ये संसार भी माँ से बना है

माँ के दर से कोई सवाली कभी न खाली जाए,

सचे मन से उसे पुकारू वो ही कष्ट मिटाए,

हारे मन की गुदगार की माँ है

ये माँ सारे संसार की माँ है

माँ जैसा कोई जग में कहा है

ये संसार भी माँ से बना है

प्रेम की भाषा समजे हिया वो प्रेम से ही मिल पाए

प्रेम के बंधन में बंध कर ही बेडा पार लगाये

प्रेम की हर अधिकार की माँ है

ये माँ सारे संसार की माँ है

माँ जैसा कोई जग में कहा है

ये संसार भी माँ से बना है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।