बनी बनी रे जोगन भोले बाबा की जोगन

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बनी बनी रे जोगन भोले बाबा की जोगन

लागी लागी रे लगन भोले बाबा की लगन

बनी बनी रे जोगन भोले बाबा की जोगन

तेरी आँखों से आंखे मिला बेठी

अपना तन मन सब तुझपे लुटा बेठी

तेरे चरणों में सिर को जुका बैठी

अपनी काशी अलग मैं बना बैठी,

रंग दे रंग में अपने रंगरेजवा

तेरी जोगन तेरे दर पे आ बेठी

बनी बनी रे जोगन भोले बाबा की जोगन

दिल में लगा है शिव का डेरा,

बन हर काम भी मेरा

मैं भोले की भोले मेरा

करती हु हर दम मैं नमन

बनी बनी रे जोगन भोले बाबा की जोगन

मैं हु जोगन भोली भाली

हाथ तमुरा पूजा की थाली

भोले बाबा को चाहने वाली

भोले की धुन में रहती मगन

बनी बनी रे जोगन भोले बाबा की जोगन

किरपा करो मेरे भोले शंकर,

मुझको बना लो पैरो का कंकर

मुझपे चला दो तंतर मन्त्र

मिल जाए मुझे तेरे दर्शन

बनी बनी रे जोगन भोले बाबा की जोगन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।