गणनायक से मन

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गणनायक से हट कर मन कही जाता नही है,

सच पूछो तो उन जैसा कोई दाता नही

है सुख कही दर्द समजलो यही है

गणनायक से हट कर मन कही जाता नही है,

भगतो की आशायो को जो पूरी कर दे

रिधि सीधी से वरनायक झोली भर दे

रोशनी से भर दिए आँखों के दिए

नाव में दे जिनकी थी वो भी है जिए

अनहोनी को होनी कर दे देवा याहा

इनके चरणों में दिल गबराता नही हिया

गणनायक से हट कर मन कही जाता नही है,

आते है सवाली कई सवाल लिए

संग कई उल्ज्नो के जाल लिए

अन्तर्यामी ने सब को जवाब दिए

जो भी आये लौटे नए खाव्ब लिए

अपनी करनी का करले इकरार याहा

इस मंदिर जैसा मिलता दरबार काहा

दिल खोले में कोई शरमाता नही है

याहा गणना हो वाहा विघन आता नही है

तुझबिन कोई दुःख हरता कहलाता नही है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।