गणपति देवा हो

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ये हिमाल माझ, शिव को सौरास.

ये हिमाल माझ, शिव को सौरास.

पार्वती को मैत गणपति देवा हो..

पार्वती को मैत गणपति देवा हो..

गोलु गंगी सैमा भैरो भुमिया का भुमियाला.

गोलु गंगी सैमा भैरो भुमिया का भुमियाला.

यो भूमि उजाई रौली जब तक याँ रुलो.

यो भूमि उजाई रौली जब तक याँ रुलो.

तेरो चैं आशिशा हो.... गणपति देवा हो....

कसारी की भगवती नन्दा कोट नन्दामायी.

कसारी की भगवती नन्दा कोट नन्दामायी.

आदी शक्ति वैष्णो माता करिये सबोकैं छाई.

आदी शक्ति वैष्णो माता करिये सबोकैं छाई.

देश परदेशा हो... गणपति देवा हो..

राजी खुशी जाँ रुँलो तुमुकैंणी विसरुँलो.

राजी खुशी जाँ रुँलो तुमुकैंणी विसरुँलो.

तुमरौ मान सम्मान तुमरौ गीत गानै रुँलो.

तुमरौ मान सम्मान तुमरौ गीत गानै रुँलो.

तुमरी छु शरण हो.... गणपति देवा हो..

यो हिमाल माझी शिव को कैलाश.

पार्वती को मैत गणपति देवा हो...

जय जय गणपति महाराज

सुरेश चन्द्र पाठक.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।