डम डमा डम डमरु बाजीग्यो हिमाला कुमाऊँनी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डम डमा डम डमरु बाजीग्यो हिमाला,

म्यार शिव शंकर देवो मै निराला.

खुट मै घुँघरु छान आंग बाग छाला,

हाथ मै त्रिशूल डमरु गाव नाग माला.

हे आंग बभूति रमा रा छौ...

डम डमा डम डमरु बाजीग्यो हिमाला,

सबोंकै दगाड़ माझी तुम शिव भैया.

बिष कै यो प्याल कैणी हल हल पी गया.

रे हल हल पी गया हो...

डम डमा डम डमरु बाजीग्यो हिमाला,

गोदि मै भै ऋ गणपती बप्पा संग मै ब्रह्मा.

तुम भै रैछा कैलाश माथी हम चा रयाँ याँ.

रे दगड़ मै नन्दी बिराज....

डम डमा डम डमरु बाजीग्यो हिमाला,

कैलाश मै बैठी रुछा लोगों कै देखछा.

रे गुस्सै मैणी जब उँछा ताण्डव करछा.

हे ताण्डव करछा हो....

डम डमा डम डमरु बाजीग्यो हिमाला,

सुरेश पाठक

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।