खम्मा-खम्मा हो रामा रूनिचे रा धनिया

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

खम्मा-खम्मा हो रामा रूनिचे रा धनिया ॥

थाने तो ध्यावे आखो मारवाड हो, आखो गुजरात हो अजमाल्जी रा कवरा...

भादुरेडी दूज ने चमकियो जी सितारो ॥

पालनिया मे झूलने आयो पालन हरो ॥

दुवरिका रा नाथ झूले पालनिया हो रामा दुवरिका रा नाथ झूले पालनिया,हो जमाल्जी रा कवरा.

बाडोरा विरमदेव छोटा रामदेवजी ॥

धोररी धरती मे आया,आया रामपीरजी॥

कूम-कूरा पगलिया मन्डिया आग्निया हो रामा कूम-कू रा पग्लिया माध्िया आग्निया,हो अजमाल्जी रा कवरा

अरे सिरपे कीलंगी-तूररो केसरिया हे जामो ॥

भागता री भीड़ आवे भोलो पियर रामो ॥

भागता रो मान बडावलिया हो रामा भागता रो आन बड़वलिया,हो जमाल्जी रा कवरा

माता मेना दे ज्यारा पीता आजमल्जी

सुगनारा बीर रानी नेतल रा भरतार जी

जगमग ज्योत जागवानिया हो रामा जगमग ज्योत जागवानिया , हो जमाल्जी रा कवरा

दिन बिटिया राता बीती बाबा थाने फेरता ॥

बरसारा रा बरस बिटिया माला तरी फेरता॥

हातरी दुखानने लागी हूओ.ऊ.ऊ.ओ हातरी दुखानने लागी आगलिया हो बाबा आगलिया,अजमाल्जी रा कवरा

डाली बाई बाबा थारा पग्ल्या पखारसी

लछा और सुगना बाई करे हर की आरती

हर्जी भाटी रे मन भवनिया हो रामा हर्जी भाटी रे मन भवनिया, अजमाल्जी रा कवरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।