हाट की कालिका मय्या कुमाऊँनी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे माँ भगवती तू दैण है भक्तो मै आपणी छाया करीये.

हाट की जै जै माँ

हाट की जै जै माँ कालिका मय्या दैणा होये सबोंकी तरफ़.

हो दैण होये सबोंकी तरफ़.

छोर बागेश्वर मय्या दनपूर कमस्यार.

ताला देश माला देश ज्वार मुन्सयार.

तेरी है रै जै जै माँ, तेरी है रै जै जै माँ.

जैजैकारा मय्या दैणा होये सबोंकी तरफ़.

हाट की....

अज्ञानी कैं ज्ञान दिछी रोगियों कैं काया, निर्बल कैं बल दिछी निर्धनों कैं माया.

घर बण जै जै माँ, घर बण जै जै माँ.

घर बण परदेश मय्या दैणा होये सबोंकी तरफ़.

हाट की....

मै अज्ञानी निर्बुधि, आयुँ तेरा द्वार. मन मुराद पुर करीदे, करिदे चमतकार.

दया की जै जै माँ दया की जै जै माँ.

नजर मय्या करीदिये सबोंकी तरफ़.

हो देण होये सबोंकी तरफ़.

हाट की......

जय माता दी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।