नाचे नाचे रे माँ का शेर कमाल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नाचे नाचे रे माँ का शेर कमाल,

माँ की भगती में दे दे नाचे ताल

फुदक फुदक के नाचे देखो उछल उछल के नाचे

झूम झूम के नाचे देखो ठुमक ठुमक के नाचे

नाचे नाचे रे माँ का शेर कमाल,

इसने माँ के जगराते में कैसी धूम मचाई है

गरज गरज के इस ने सारी मेफिल फिर बुलाई है

रे माँ की रक्षा में खड़ा है बन के ढाल

नाचे नाचे रे माँ का शेर कमाल,

मैया जी की चुनर देखो तन पे अपने ढाले है

संग में नाचे मैया जी के भगत बड़े मत वाले है

नाच रहे हाथो में लेके सब लेके खडताल

नाचे नाचे रे माँ का शेर कमाल,

भगतो से ये हाथ उठा कर ये जय कारे लगावाता है

कुर्मी अमन सिफारिश करके बिगड़े काम बनाता है

ये केशव शर्मा भी मैया का है लाल

नाचे नाचे रे माँ का शेर कमाल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।